"एक दिन मैं भी मोदी जैसा बनूँ" - For Shri Narendra Damodardas Modi [Wrote On: 17th September, 2025] | Poem by Abhansh Srivastava 💙🤍
आकाश का सीना चीरकर,
अंधेरी रात को अपने तेज से हराकर,
ठंडी में ठिठुरते जीवों को अपने सीने से लगाकर,
इस जीवन की राह को प्रज्वलित करने… सूरज निकलता है।
और सूर्य नमस्कार कर रहे हर योगी के दिल में,
इस देश में दिवाली, ईद, वैशाखी और क्रिसमस मनाने वाले हर व्यक्ति के दिल में,
और इन त्योहारों के दिन भी, अपने फौज के जवानों की तरह, अपने देश के कामों में जुटे मोदी जी के दिल में,
इस देश में होने वाली हर सुबह… सिर्फ़ तिरंगा रहता है।
जब बचपन में ढेर सारा ढोकला खाया होगा,
या मात्र 17 की उम्र में घर छोड़ के देश का भ्रमण किया होगा,
जब 1975 में इमरजेंसी के विरुद्ध नेतृत्व किया होगा,
तब किसने सोचा होगा…
एक दिन ये बच्चा… पूरे देश में “अच्छे दिन” लाने वाला होगा।
हमारे नवजवानों को जगाने वाला होगा,
इस देश का पूरे विश्व में सम्मान बढ़ाने वाले होगा,
इस देश के लिए “मैं भी कुछ करूँ” ये स्वप्न लोगों के नीदों में पिरोने वाला होगा,
“एक दिन मैं भी मोदी जैसा बनूँ” यह प्रभाव उनके दिलों पर छोड़ने वाला होगा।
~ अभांश श्रीवास्तव 💙🤍
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